तुम फिर से लौटकर नही आओगी,
मैं जानता था..
तुम चाहकर भी मेरी नहीं हो पाओगी,
मैं जानता था..
मिलोगी भी कभी तो तुम, ऐसे मोड़ पर,
की हस कर मुझे अजनबी बताओगी,
मैं जानता था..
फिर घर जाकर कोसोगी उस अतीत को,
और रोकर आँसुओ से भीग जाओगी,
मैं जानता था..
तुम नही चाहोगी किसी के लिए संवरना,
पर तुम नारी हो, संवर ही जाओगी,
मैं जानता था..
फिर से होगी एक दिन, तुम पर महर वक़्त की,
और तुम हर दुख से उबर जाओगी,
मैं जानता था..
जिस दिन मिलेगी खबर तुम्हे, मेरे गुजर जाने की,
तो तुम बस एक लम्बी साँस भर पाओगी,
मैं जानता था..
Santosh Gupta
मैं जानता था..
तुम चाहकर भी मेरी नहीं हो पाओगी,
मैं जानता था..
मिलोगी भी कभी तो तुम, ऐसे मोड़ पर,
की हस कर मुझे अजनबी बताओगी,
मैं जानता था..
फिर घर जाकर कोसोगी उस अतीत को,
और रोकर आँसुओ से भीग जाओगी,
मैं जानता था..
तुम नही चाहोगी किसी के लिए संवरना,
पर तुम नारी हो, संवर ही जाओगी,
मैं जानता था..
फिर से होगी एक दिन, तुम पर महर वक़्त की,
और तुम हर दुख से उबर जाओगी,
मैं जानता था..
जिस दिन मिलेगी खबर तुम्हे, मेरे गुजर जाने की,
तो तुम बस एक लम्बी साँस भर पाओगी,
मैं जानता था..
Santosh Gupta

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