Hi i am Santosh Gupta रहे ना कुछ मलाल बड़ी शिद्दत से कीजिए। नफरत भी कीजिए जनाब तो जरा मोहब्ब्त से कीजिए। ROMANTIC VILLAIN SANTOSH GUPTA
Saturday, June 30, 2018
Santosh Gupta
Santosh Gupta
किसने कहा तुझे अनजान बनके आया कर।
मेरे दिल के आईने में मेहमान बनके आया कर।
अरे पागल
एक तुझे ही तो बख्शी है इस दिल की हुकूमत।
ये तेरी सल्तनत है सुल्तान बनके आया कर।
®💲💘💋👈
किसने कहा तुझे अनजान बनके आया कर।
मेरे दिल के आईने में मेहमान बनके आया कर।
अरे पागल
एक तुझे ही तो बख्शी है इस दिल की हुकूमत।
ये तेरी सल्तनत है सुल्तान बनके आया कर।
®💲💘💋👈
Tuesday, May 15, 2018
Santosh Gupta
आओ सनम इस पल को भी मैं प्यार का पल लिख दूँ
तुम बैठो मेरे सामने मैं तुझपे इक ग़ज़ल लिख दूँ
लगती है भीड़ दुनिया की रोज तेरे दीदार को
क्या है गलत इसमें गर तुमको ताजमहल लिख दूँ
धड़कने लगता है हर सूरत को तेरी सूरत जान के
सोच रहा हूँ मैं अपने इस दिल को पागल लिख दूँ
जबसे मिली है तू कोई और नहीं हसरत मेरी
क्यों ना अब अपनी जिंदगी को मैं मुकम्मल लिख दूँ।
तुम बैठो मेरे सामने मैं तुझपे इक ग़ज़ल लिख दूँ
लगती है भीड़ दुनिया की रोज तेरे दीदार को
क्या है गलत इसमें गर तुमको ताजमहल लिख दूँ
धड़कने लगता है हर सूरत को तेरी सूरत जान के
सोच रहा हूँ मैं अपने इस दिल को पागल लिख दूँ
जबसे मिली है तू कोई और नहीं हसरत मेरी
क्यों ना अब अपनी जिंदगी को मैं मुकम्मल लिख दूँ।
Santosh Gupta
तेरे होने से थी आबाद "हमारी अधूरी कहानी"
जो कर गई मुझे बर्बाद "हमारी अधूरी कहानी"
शायद नम हुआ करेंगी मेरी भी आंखें जब
कभी आयेगी याद "हमारी अधूरी कहानी"
कभी सोचा करेंगे हम जब अपनी दास्तां को
के कभी तो थी आबाद "हमारी अधूरी कहानी"
हो मुमकिन तो लौट आओ मेरे पास "Ree"
कर रही है फरियाद "हमारी अधूरी कहानी"
लाख चाहा मुकम्मल ना हो सकी
हर पल मांगती रही मुराद "हमारी अधूरी कहानी"
SanTosH GuptA
जो कर गई मुझे बर्बाद "हमारी अधूरी कहानी"
शायद नम हुआ करेंगी मेरी भी आंखें जब
कभी आयेगी याद "हमारी अधूरी कहानी"
कभी सोचा करेंगे हम जब अपनी दास्तां को
के कभी तो थी आबाद "हमारी अधूरी कहानी"
हो मुमकिन तो लौट आओ मेरे पास "Ree"
कर रही है फरियाद "हमारी अधूरी कहानी"
लाख चाहा मुकम्मल ना हो सकी
हर पल मांगती रही मुराद "हमारी अधूरी कहानी"
SanTosH GuptA
Santosh Gupta
इंतज़ार हुआ अब मुश्किल ,
कसम है ,
तुम लौट 💃आओ ना
राह तकते तकते पथरा गयी आँखे ,
करना है दीदार
तुम लौट 💃आओ ना
यही एक उम्मीद है, और जिद है ,
दिल भी कहता है तू लौट के आएगा.
अधूरा सा हूँ मै,
तुम लौट 💃आओ ना
करना है दीदार तुम लौट 💃आओ ना
कौन समझेगा मेरी चाहत ,
कौन समझेगा मेरी ये तड़प,
कहाँ से लाऊँ कोई दूसरा दिल हंसने को ,
लोग भी पूछते हैं कि मै चुप क्यों हूँ.
मुझे हँसाओ ,
तुम लौट 💃आओ ना
"SaNtosH" को करना हैं दीदार
सुनो अब
तुम लौट 💃आओ ना
कसम है ,
तुम लौट 💃आओ ना
राह तकते तकते पथरा गयी आँखे ,
करना है दीदार
तुम लौट 💃आओ ना
यही एक उम्मीद है, और जिद है ,
दिल भी कहता है तू लौट के आएगा.
अधूरा सा हूँ मै,
तुम लौट 💃आओ ना
करना है दीदार तुम लौट 💃आओ ना
कौन समझेगा मेरी चाहत ,
कौन समझेगा मेरी ये तड़प,
कहाँ से लाऊँ कोई दूसरा दिल हंसने को ,
लोग भी पूछते हैं कि मै चुप क्यों हूँ.
मुझे हँसाओ ,
तुम लौट 💃आओ ना
"SaNtosH" को करना हैं दीदार
सुनो अब
तुम लौट 💃आओ ना
= SanTosH GuptA
Santosh Gupta
तेरी मुश्किल ना बढाऊंगा , चला जाऊंगा,
अश्क आँखो में छुपाऊंगा, चला जाऊंगा,
अपनी दहलीज पर कुछ देर तो पड़ा रहने दे,
जैसे ही होश में आऊंगा, चला जाऊंगा..!
मुद्दतों बाद आया हूं पुराने घर में,
खुद को जी भरके रूलाऊंगा, चला जाऊंगा...!
इस दुनियां से कुछ भी नही लेना मुझको,
बस तुम्हें देखने आऊंगा, चला जाऊंगा.... !
चंद यादें "SaNtosH" को बच्चों की तरह प्यारी है,
उनको सीने से लगाऊंगा, चला जाऊंगा ...!!
Santosh Gupta
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Santosh Gupta
टुकड़ों में बिखरा हुआ किसी का जिगर दिखाएँगे
कभी आना हमारी बस्ती तुम्हे अपना घर दिखाएँगे !
होंठ काँप जाते हैं थर-थर्राती है ज़ुबान
टूटे दिल से निकली हुई आहों का असर दिखाएँगे !
एक पहुँच पाता नहीं और एक छलक जाता है
पलकों से दामन तक का अश्कों का सफ़र दिखाएँगे !
कभी आना हमारी बस्ती तुम्हे अपना घर दिखाएँगे !!
कहीं तस्वीर है तेरी कहीं लिखा है तेरा नाम
मंदिर-मस्जिद जितना पाक एक दीवार-ओ-दर दिखाएँगे !
अक्सर तकती रहती है सुनसान राहों को सनम
दरवाज़े पर बैठी हुई सपनो की नज़र दिखाएँगे।
कभी आना हमारी बस्ती "Santosh"तुम्हे अपना घर दिखाएँगे !!
कभी आना हमारी बस्ती तुम्हे अपना घर दिखाएँगे !
होंठ काँप जाते हैं थर-थर्राती है ज़ुबान
टूटे दिल से निकली हुई आहों का असर दिखाएँगे !
एक पहुँच पाता नहीं और एक छलक जाता है
पलकों से दामन तक का अश्कों का सफ़र दिखाएँगे !
कभी आना हमारी बस्ती तुम्हे अपना घर दिखाएँगे !!
कहीं तस्वीर है तेरी कहीं लिखा है तेरा नाम
मंदिर-मस्जिद जितना पाक एक दीवार-ओ-दर दिखाएँगे !
अक्सर तकती रहती है सुनसान राहों को सनम
दरवाज़े पर बैठी हुई सपनो की नज़र दिखाएँगे।
कभी आना हमारी बस्ती "Santosh"तुम्हे अपना घर दिखाएँगे !!
Santosh Gupta
ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं,
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
तू मिला है तो ये अहसास हुआ है मुझको ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है।
इक ज़रा-सा ग़म-ए-दौराँ का भी हक़ है.
जिस पर मैंने वो साँस भी तेरे लिए रख छोड़ी है।
तुझ पे हो जाऊँगा क़ुर्बान तुझे चाहूँगा,
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
अपना जज़्बात में नग़मात रचाने के लिए.
मैंने धड़कन की तरह दिल में बसाया है तुझे।
मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करूँ.
मैंने क़िस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे।
प्यार का बन के निगाह-बान तुझे चाहूँगा.
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
SaNtosh GuptA
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Santosh Gupta
मौत के पास भी जाकर देखा है,
मैने भी दिल लगा कर देखा है!
"चाँद को लोग दुर से देखते है,
मैने चाँद को पास बुला कार देखा है!
"इश्क की किमत पुँछ लो मुझसे,
मैने घर तक लुटा कर देखा है!
"प्यार तो भीख मेँ भी मिल जाता है,
मैने तो दामन को भी फैला कर देखा है!
"एक शंक्स है जो भुलता नही मुझसे...
मैने सारी दुनियाँ को भुला कर देखा है.!
मौत के पास भी जाकर देखा है,
मैने भी दिल लगा कर देखा है!
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Santosh Gupta
मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से टकराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीजें भी बंधवाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
तन्हाई के झूले झूलोगे, हर बात पुरानी भूलोगे
आईने से घबराओगे, जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
बेचैनी जब बढ़ जायेगी और याद किसी की आयेगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा।
दीवारों से टकराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीजें भी बंधवाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
तन्हाई के झूले झूलोगे, हर बात पुरानी भूलोगे
आईने से घबराओगे, जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
बेचैनी जब बढ़ जायेगी और याद किसी की आयेगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा।
Santosh Gupta
अब तो तुम संग जिन्दगी बिताने का इरादा है
जो नहीं तो कसम से फिर, मर जाने का इरादा है।
🍷
जल रहे हैं दीपक क्यूँ आँधियों में इस तरह
चले आओ कि दीपक बुझाने का इरादा है।
🍷
तुम्ही हो इबादत मेरी तुम्ही हो बंदगी मेरी
किया है जो वादा तो निभाने का इरादा है।
🍷
सावन की वर्षा में तो भीगे हैं हम कई बार
अब बिन मौसम बादल बरसाने का इरादा है।
🍷
बगिया महकने लगी , कोयल चहकने लगी
उठो नीद से अब कि तुम्हे जगाने का इरादा है।
🍷
माफ़ करना, बिन दस्तक चले आये दिल में तुम्हारे
कि खुद को तुम्हारे दिल में बसाने का इरादा है।
कैसे जीयें अब एक पल भी साकी तुम्हारे बिन हम
कि दिल की बात तुम तक पंहुचाने का इरादा है।
🍷
कई बार लिखा है दिल की बात को हमने ख़त में
पर अब तो रूबरू आपको कुछ सुनाने का इरादा है।
🍷
कितना भी संभले हम, पर दर्द है कि जाता नहीं
कि दर्दे-ए-दिल अब तो कलेजे से लगाने का इरादा है
🍷
आपकी बातें तो दिल पर काँटा सा चुभोती है..!
इसलिए यह ख्याल पलकों पर सजाने का इरादा है।
जो नहीं तो कसम से फिर, मर जाने का इरादा है।
🍷
जल रहे हैं दीपक क्यूँ आँधियों में इस तरह
चले आओ कि दीपक बुझाने का इरादा है।
🍷
तुम्ही हो इबादत मेरी तुम्ही हो बंदगी मेरी
किया है जो वादा तो निभाने का इरादा है।
🍷
सावन की वर्षा में तो भीगे हैं हम कई बार
अब बिन मौसम बादल बरसाने का इरादा है।
🍷
बगिया महकने लगी , कोयल चहकने लगी
उठो नीद से अब कि तुम्हे जगाने का इरादा है।
🍷
माफ़ करना, बिन दस्तक चले आये दिल में तुम्हारे
कि खुद को तुम्हारे दिल में बसाने का इरादा है।
कैसे जीयें अब एक पल भी साकी तुम्हारे बिन हम
कि दिल की बात तुम तक पंहुचाने का इरादा है।
🍷
कई बार लिखा है दिल की बात को हमने ख़त में
पर अब तो रूबरू आपको कुछ सुनाने का इरादा है।
🍷
कितना भी संभले हम, पर दर्द है कि जाता नहीं
कि दर्दे-ए-दिल अब तो कलेजे से लगाने का इरादा है
🍷
आपकी बातें तो दिल पर काँटा सा चुभोती है..!
इसलिए यह ख्याल पलकों पर सजाने का इरादा है।
Sunday, May 6, 2018
Santosh Gupta
इश्क़ में दिल का दाम बहुत है।
फिर भी दिल बदनाम बहुत है।
छोड़ दिया है साथ सभी ने,
अब मुझको आराम बहुत है।
दूर हूं मैं ऐसे लोगों से,जो कहते हैं काम बहुत है।
दिल के कितने छोटे निकले,जिन लोगों का नाम बहुत है।
भूल सकते हो अगर, तो भूल जाओ, इजाज़त है तुम्हें,
न भूल पाओ तो लौट कर आना, एक और भूल की इजाज़त है तुम्हें!
दूर न जाया करो दिल तड़प जाता है,तेरे ही खयालों में दिन गुजर जाता है,आज पूछा है दिल ने एक सवाल तुमसे,क्या दूर रहकर तुमको भी हमारा खयाल आता है…
"तुम" नहीं हो, तो कितना खल रहा है,,
"इश्क" क्या होता है, पता चल रहा है!
अपनी यादों में मुझे कभी यूँ ही ढूंढ लेना तुम,ना मिलूं तो धड़कनों से मेरा पता पूछ लेना तुम,
रहूँगा मौजूद मैं इन हवाओं में हमेशा, फिर भी,ना दिखूं तो इन्हें अपनी साँसों से छू लेना तुम,
मेरी ग़ज़ल की हर शायरी में रहते हो बस तुम,अपनी तन्हाइयों के साथ इसे भी सुन लेना तुम,
हकीकत में जाने कभी, हमारी मुलाकात हो ना हो,इसलिए अपने ख्वाबों में मुझको बुन लेना तुम,
यूँ तो ज़िन्दगी की राहों में मिलेंगे कांटे ही कांटे, मगर मेरे हिस्से के भी फूल चुन लेना तुम।।
नहीं भाता अब तेरे सिवा किसी और का चेहरा,*
तुझे देखना और देखते रहना दस्तूर बन गया है।*
*लोग कुछ भी कहे,,,**हमवही करेंगे**जो हमे अच्छा लगे....**क्योंकी वो_वो है और हम_हम है...**~↳["दिल❤अपना प्रीत👩🏼पराई"]↰~* *~My.love.is.my.life~*_Santosh Gupta_
Santosh Gupta
तुम फिर से लौटकर नही आओगी,
मैं जानता था..
तुम चाहकर भी मेरी नहीं हो पाओगी,
मैं जानता था..
मिलोगी भी कभी तो तुम, ऐसे मोड़ पर,
की हस कर मुझे अजनबी बताओगी,
मैं जानता था..
फिर घर जाकर कोसोगी उस अतीत को,
और रोकर आँसुओ से भीग जाओगी,
मैं जानता था..
तुम नही चाहोगी किसी के लिए संवरना,
पर तुम नारी हो, संवर ही जाओगी,
मैं जानता था..
फिर से होगी एक दिन, तुम पर महर वक़्त की,
और तुम हर दुख से उबर जाओगी,
मैं जानता था..
जिस दिन मिलेगी खबर तुम्हे, मेरे गुजर जाने की,
तो तुम बस एक लम्बी साँस भर पाओगी,
मैं जानता था..
Santosh Gupta
मैं जानता था..
तुम चाहकर भी मेरी नहीं हो पाओगी,
मैं जानता था..
मिलोगी भी कभी तो तुम, ऐसे मोड़ पर,
की हस कर मुझे अजनबी बताओगी,
मैं जानता था..
फिर घर जाकर कोसोगी उस अतीत को,
और रोकर आँसुओ से भीग जाओगी,
मैं जानता था..
तुम नही चाहोगी किसी के लिए संवरना,
पर तुम नारी हो, संवर ही जाओगी,
मैं जानता था..
फिर से होगी एक दिन, तुम पर महर वक़्त की,
और तुम हर दुख से उबर जाओगी,
मैं जानता था..
जिस दिन मिलेगी खबर तुम्हे, मेरे गुजर जाने की,
तो तुम बस एक लम्बी साँस भर पाओगी,
मैं जानता था..
Santosh Gupta
Tuesday, May 1, 2018
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